हर शहर में क्यों न हो ऐसा स्पेशल रेस्त्रां

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हर शहर में क्यों न हो ऐसा स्पेशल रेस्त्रां हर शहर में क्यों न हो ऐसा स्पेशल रेस्त्रां

मिली जानकारी के अनुसार ईश्र्वर यदि किसी को कुछ कमियां देता है तो ऐसी खूबियां भी दे देता है, जो उसकी ताकत बनती हैं। जरूरत है उन खूबियों को समझने और सम्मान देने की। हर व्यक्ति, वह चाहे दिव्यांग हो अथवा किन्नर, समाज में अपने हिस्से का सम्मान अवश्य चाहता है। उसके हक का सम्मान समाज को उसे देना भी चाहिये। छत्तीसगढ़ स्थित लौह नगरी भिलाई के कुछ युवाओं ने यही किया है। ये युवा एक नजीर पेश करते दिख रहे हैं।

इस युवा सोच को देखना समझना हो तो भिलाई के नेहरू नगर पहुंचें। यहां एक रेस्त्रां, जहां दिव्यांग लेते हैं ऑर्डर और परोसते हैं किन्न्र ऐसा रेस्त्रां है, जहां सिर्फ इशारों में ऑर्डर लिए जाते हैं। वजह, यहां मूक-बधिर दिव्यांग यह काम करते हैं। इतना ही नहीं, समाज में हमेशा उपेक्षित रहे थर्ड जेंडर यानी किन्नर इस रेस्त्रां का किचन संभालते हैं। वे बतौर वेटर व्यंजन परोसने का काम भी करते हैं।

यहां इतना लजीज व्यंजन बनता है कि खाने वाले अंगुलियां चाटते रह जाते हैं। इन सबका मकसद रुपया पैसा कमाना नहीं बल्कि वह सम्मान पाना और कमाना है जो आमतौर पर समाज में केवल सामान्य लोगों को मिलता है।

भिलाई के इस स्पेशल रेस्त्रां में जल्द ही सेक्स वर्कर्स को भी सम्मान से जीने का अवसर मुहैया होगा। समाज से उपेक्षित सेक्स वर्कर यानी यौनकर्मी महिलाएं भी यहां पकवान परोसती नजर आएंगी।

इस रेस्त्रां में लोग बिना संकोच और पूरे परिवार के साथ आते हैं। वे न केवल लजीज खाने का आनंद उठाकर जाते हैं बल्कि एक खास अहसास भी साथ ले जाते हैं, जो उन्हें आत्मिक संतुष्टि प्रदान करता है, किसी को उसके हक का सम्मान देने की आत्मिक संतुष्टि। यहां किचन से ऑर्डर टेबल तक महज इशारों की जुबां से दिलों के तार जोड़े जाते हैं। स्वरोजगार का प्रशिक्षण ले रहे भिलाई के युवा इंजीनियर प्रियांक पटेल और उनके मित्र यह रेस्त्रां 'नुक्कड़" नाम से चला रहे हैं। इसका मकसद दिव्यांगों व समाज से उपेक्षित वर्ग को आत्मसम्मान व आत्मविश्र्वास दिलाना है। इन्हें स्वरोजगार का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

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