आठ दिनों के नवरात्रि में सात योग का अद्भुत संयोग देंगे सुख और समृद्धि

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आठ दिनों के नवरात्रि में सात योग का अद्भुत संयोग देंगे सुख और समृद्धि आठ दिनों के नवरात्रि में सात योग का अद्भुत संयोग देंगे सुख और समृद्धि

जानकारों के अनुसार भक्तों को मां दुर्गा राहत दिलाएंगी. ज्योतिषाचार्यो के मुताबिक इस बार मां का आगमन गज पर हो रहा है. जो आगामी दिनों में अच्छी बारिश के संकेत हैं. वहीं, गमन महिष पर होगा. गमन महिष पर होने का विपरीत प्रभाव पड़ने की संभावना जताई है. हलांकि, शुभ योगों के अद्भुत संयोगों में बन रहा बासंतिक नवरात्रि लोगों को सुख, समृद्धि, शांति प्रदान करेगी. बताया कि नवरात्र में अमृत योग, अमृत सिद्ध योग, सर्वार्थ सिद्ध योग, सिद्ध योग, द्विपुष्कर योगों का शुभ संयोग हो रहा है.

18 मार्च को बासंतीय नवरात्र शुरू हो रहे हैं. चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन उत्तराभाद्रपद नक्षत्र और शुक्ला योग होने की वजह से घट स्थापना सूर्योदय के बाद ही किया जाना शुभ रहेगा. संडे यानि 25 मार्च को महागौरी, मां दुर्गा की 8वीं रात्रि खंडित है. धर्म सिंधु ग्रंथ के अनुसार नवमीं विद्या चैत्र शुक्ल अष्टमी को होता है. अगर दूसरे दिन अष्टमी नवमी विद्या न मिले तो दुर्गाष्टमी पहले दिन होगी. ऐसे में 24 मार्च को ही अष्टमी मनाई जाएगी. ऐसे में महानवमी का क्षय है. सौभाग्य योग में महाष्टमी पूजन, सरस्वती पूजन, परिक्रमा होगी.

शुभ मुहूर्त

अमृत चौघडि़या - सुबह 09.26 से दोपहर 12.25 बजे तक

अभिजीत मुहूर्त - सुबह 11.39 से दोपहर 12.27 बजे तक

सर्वार्थ सिद्ध योग - सुबह 06.28 से रात 08.10 बजे तक

उत्तराभाद्रपद नक्षत्र - सुबह 08.01 बजे से सूर्यास्त तक

अभिजीत मुहूर्त में जातक घट स्थापना करें. जातक विधि विधान से पूजन करें और अगर संभव हो तो रात्रि जागरण में कीर्तन और भजन करें. नवमी तिथि का क्षय होने से आठ दिनों के नवरात्रि है.

 

चैत्र शुक्ल की प्रतिपदा इस बार सम्मुखी है. व्रत में उपवास अयाचित (बिना मांगे प्राप्त भोजन), नक्त या एक समय ही भोजन करने का संकल्प लेकर पूजन विधि की शुरुआत करनी चाहिए. परंपरागत पूजन सामग्री को लेकर मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित करें. पूर्वमुखी होकर चौकी पर लाल वस्त्र बिछाएं. मां दुर्गा के बाई ओर सफेद वस्त्र बिछाकर चावल के नौ कोष्ठक, नवग्रह व लाल वस्त्र पर गेहूं के सोलह कोष्ठक षौडशामृत बनाएं. कलश पर स्वास्तिक बना कर मौली बांधकर नारियल रखें. वहीं, अन्य पारंपरिक क्रियाएं करने के बाद बाएं हाथ से जल लेकर दाएं हाथ से स्वयं को पवित्र करें. दीपक जलाकर, दुर्गा पूजन का संकल्प लें

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