आईलाइनर लगाने का सही तरीका

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आईलाइनर लगाने का सही तरीका  आईलाइनर लगाने का सही तरीका

शोधकर्ताओं ने इस अध्ययन में पाया कि आइलाइनर के कण आंखों की आसुओं वाली झिल्ली पर पहुंचते हैं। दरअसल अश्रु झिल्ली आंखों पर एक पतली परत के रूप में मौजूद होती है जो आंखों की रक्षा करती है। आईलाइनर के कण इस झिल्ली को ही नुकसान पहुंचाते हैं। 

वाटरलू विश्वविद्यालय के साइंटिस्ट डॉक्टर एलिसन नग के अनुसार, ‘हमने अध्ययन के दौरान पाया कि मेकअप करने से आंखों में आईलाइनर के कण चले जाते हैं और जब आईलाइनर को आंख की पलकों की भीतर लगाया जाता है तो ये ज्यादा तेजी से आंख के भीतर जाते हैं।’ इस अध्ययन में हर प्रतिभागी ने पहले पलकों के बाहर की तरफ चमकने वाले (ग्लिटर) आइलाइनर को लगाया और फिर बाद में आंख से ज्यादा नजदीक रहने वाली पलकों की अंदरूनी ओर इसे लगाया।

खासकर छोटी आंखों वाली महिलाएं आईलाइनर जरूर लगाती हैं। इससे आंखें बड़ी और खूबसूरत दिखती हैं। कई लड़िकयां तो आईलाइनर लगाने में अपनी फेवरेट बॉलीवुड एक्ट्रेस को फॉलो करती हैं और उनकी तरह आईलाइनर लगाने की कोशिश करती हैं। लेकिन इसे लगाने का भी एक सही तरीका होता है। अगर आप इस तरीके को फॉल नहीं करती हैं तो आपकी आंखें खराब हो सकती हैं। 

गलत तरीके से आईलाइनर लगाने से मेकअप तो खराब होता ही है साथ में इससे आपकी आंखों को भी काफी नुकसान पंहुचता है। वैसे भी आंखों का मेकअप करने के लिए अच्छे प्रोडक्ट्स का यूज़ करना ही काफी नहीं होता है। इन प्रॉडक्ट्स का अच्छे तरीके से भी यूज़ करना भी जरूरी होता है। 

आईलईनर  लगाने से कई बार ईचिंग की भी समस्या होती है। ऐसा गलत तरह के आईलाइनर का इस्तेमाल करने से होता है। इसलिए किसी भी इस तरह के आईलाइनर का इस्तेमाल ना करें जो आपकी स्किन पर सूट नहीं करती हो। क्योंकि आंखों के ऊपर की स्किन काफी नाजुक होती है जो किसी भी तरह के प्रोडक्ट से तुरंत डैमेज हो जाती है और फिर इचिंग व रैशेज की समस्या होने लगती है।  

वाटरलू विश्वविद्यालय में एक रिसर्च हुई है जिसमें इस बात की चेतावनी दी गई है कि आंखों की पलकों के भीतर और बाहर लगाया जाने वाला आईलाइनर आंखों की रोशनी को नाकारत्मक रूप से प्रभावित कर सकता है। यह इस तरह का पहला अध्ययन है जो ये बताता है कि पेंसिल आइलाइनर लगाते वक्त इसके कण आंखों में चले जाते हैं।

आईलाइनर जब आप आंखों की पलकों के भीतर और बाहर लगाती हैं तो उसके कुछ कण आंखों के अंदर चले जाते हैं। जिससे आंखों की रोशनी को नाकारत्मक रूप से प्रभावित होती है। यह इस तरह का पहला अध्ययन है जो ये बताता है कि पेंसिल आइलाइनर लगाते वक्त इसके कण आंखों में चले जाते हैं।

 

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