जलियावाला हत्या कांड के बाद रातों को सो नहीं पाया जनरल डायर

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जलियावाला हत्या कांड के बाद रातों को सो नहीं पाया जनरल डायर जलियावाला हत्या कांड के बाद रातों को सो नहीं पाया जनरल डायर

भारत के इतिहास में 13 अप्रैल, 1919 एक ऐसा ही दिन है। बैसाखी के दिन पंजाब में अमृतसर के जलियांवाला बाग में ब्रिटिश ब्रिगेडियर जनरल रेजीनॉल्ड डायर के नेतृत्व में अंग्रेजी फौज ने गोलियां चला कर निहत्थे सैकड़ों लोगों को मार डाला था और हजारों घायल हो गए थे। जनवरी 1921 में एक लेख में डायर ने लिखा था कि यह शुरूआत हुई क्योंकि 'भारत स्व-सरकार नहीं चाहती थी। वह इसे नहीं समझती थी।' बाद में उन्होंने लिखा कि फ्री स्पीच और फ्री प्रेस केवल प्रबुद्ध लोगों के लिए है। भारतीय लोगों को ऐसा कोई ज्ञान नहीं चाहिए। उन्होंने यह भी लिखा कि महात्मा गांधी जैसा इंसान भी भारत में अपने दम पर सरकार नहीं चला पाएंगे। इसलिए ब्रिटिश राज जारी रहना चाहिए।

गौरतलब है कि जनरल डायर की पैदाइश ब्रिटिश इंडिया में ही हुई थी। उनका जन्म ब्रिटिश इंडिया के पंजाब प्रांत मुर्री में हुआ था जो कि अब पाकिस्तान में है। उसके पिता एडवर्ड अब्राहम डायर थे जो कि शराब बनाने का काम करते थे। उनका बचपन मुर्री और शिमला में बिता, स्कूलिंग भी यहीं हुई। इसके बाद आयरलैंड में ग्रेजुएशन किया था। डायर ने 4 अप्रैल, 1888 में भारत के झांसी के सेंट मार्टिन चर्च में एनी ओममेनी से शादी की थी जो कि एडमुंड पाइपर ओममेनी की बेटी थी।

 

कहा जाता है कि इस नर-संहार के बाद जनरल डायर एक भी रात चैन से नहीं सो पाया। उसका स्वास्थ्य लगातार खराब होता गया और उसे लकवा मार गया। वह मरते दम तक उससे नहीं उबर पाया। 23 जुलाई, 1927 को ब्रिस्टल में उसकी मौत हो गई। इस घटना के छह महीने बाद डायर ने अपने दोस्त से कहा था, 'उस दिन के बाद मैं रातों को सो नही पाया। मुझे यह सब बार-बार नजर आता है।'

यही नहीं अंतिम दिनों में जनरल डायर के यही शब्द थे, 'कुछ कहते हैं कि मैंने अच्छा किया तो कुछ लोग कहते हैं कि मैंने बुरा किया, लेकिन मैं मरना चाहता हूं ताकि मैं अपने ईश्वर से जाकर पूछ सकूं कि मैंने अच्छा किया या बुरा।'

हालांकि इस नर-संहार के बाद उसे सफाई भी देनी पड़ी थी। नरसंहार किए जाने के तुरंत बाद, उसने अपने को निर्दोष बताने के लिए अलग-अलग स्पष्टीकरणों की एक श्रृंखला बनाई। बाद में, भारत में अपने सभी वरिष्ठों से अपने इस काम का अप्रूवल मिलने बाद डायर ने कहा कि उसका यह काम उन लोगों को दंडित करने के लिए जानबूझकर किया गया प्रयास था जो कि विद्रोही थे और पंजाब के बाकी हिस्सों में उदाहरण स्थापित करना था।

जनरल डायर ने अपनी कार्रवाई को सही ठहराने के लिए तर्क दिये और कहा कि 'नैतिक और दूरगामी प्रभाव' के लिए यह जरूरी था। इसलिए उन्होंने गोली चलवाई।

आखिरकार, 1920 में इंग्लैंड लौटने के बाद, डायर के वकील ने तर्क दिया कि उनके इस एक्शन को उचित माना गया है क्योंकि उन्हें एक विद्रोह का सामना करना पड़ रहा था और उस आधार पर फायरिंग जायज थी।

 

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