बिश्नोई समाज के बारे में कुछ रोचक बातें

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बिश्नोई समाज के बारे में कुछ रोचक बातें बिश्नोई समाज के बारे में कुछ रोचक बातें

जानकारों के अनुसार बिश्नोई समाज केवल राजस्थान में ही नहीं बल्कि हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में भी आबाद हैं। बिश्नोई समाज जानवरों पर अपनी जान छिड़कता है। बिश्नोई समाज की मान्यता है कि उनके संस्थापक जम्भेश्वर जी ने जीव दया का पाठ पढ़ाया था। वे कहते थे, 'जीव दया पालनी, रूंख लीलू नहीं घावे' अर्थात जीवों के प्रति दया रखनी चाहिए और पेड़ों की हिफाजत करनी चाहिए। इन कार्यो से व्यक्ति को बैकुंठ मिलता है।" बिश्नोई अपने आराध्य गुरु जम्भेश्वर के बताए 29 नियमों का पालन करते हैं। बिश्नोई समाज पर्यावरण के प्रति जागरूक रहता है- "जोधपुर रियासत में जब सरकार ने पेड़ काटने का आदेश दिया था तो बिश्नोई समाज के लोग विरोध में आ खड़े हुए थे। ये 1787 की बात है, उस वक्त राजा अभय सिंह का शासन था।" बिश्नोई समुदाय के लोगों का कहना भी है कि जब रियासत के लोग पेड़ काटने के लिए आते थे तो जोधपुर के खेजड़ली और आस-पास के लोग इसका विरोध करते थे। "उस वक्त बिश्नोई समाज की अमृता देवी ने पहल की और पेड़ के बदले खुद को पेश किया।" बिश्नोई समाज की तरफ से जोधपुर में खेजड़ली मेला आयोजित किया जाता है। ये मेला पर्यावरण और जीव-जन्तु के प्रति उनकी आस्था का ही प्रतीक है। इस मेले के दौरान लोग अपने पुरखों की कुर्बानी को श्रदा सुमन अर्पित करते हैं। गुरु जम्भेश्वर को बिश्नोई समाज अपना गुरु मानते हैं। इनका जन्म 1451 में हुआ था। बीकानेर जिले में अपने गुरु का जन्म स्थान समरथल बिश्नोई समाज का तीर्थ स्थल है। वहीं, उस क्षेत्र के मकाम में गुरु जम्भेश्वर का समाधि स्थल बनाया गया। जहां हर साल मेला आयोजित किया जाता है।

 

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