देवगिरी किला जहां से चलाया जाता था शासन अब बन गया पर्यटन स्थल

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देवगिरी किला जहां से चलाया जाता था शासन अब बन गया पर्यटन स्थल देवगिरी किला जहां से चलाया जाता था शासन अब बन गया पर्यटन स्थल

मिली जानकारी के अनुसार 13वीं सदी के देवगिरि नरेश कृष्ण का नाम अनेक लेखों में मिलता है. कृष्ण के पुत्र रामचंद्र के शासन में खिलजी वंश के सुल्तान अलाउद्दीन ने देवगिरि पर चढ़ाई की थी. देवगिरि दक्षिण भारत का प्रसिद्ध ऐतिहासिक नगर जो आजकल दौलताबाद के नाम से पुकारा जाता है. भीलम नामक राजा ने इसे 11वीं सदी में बसाया था और उसी काल से दो सौ वर्षों तक हिंदू शासकों ने देवगिरि पर शासन किया. 14वीं सदी से यह नगर मुसलमानों के अधिकार में चला आया. देवगिरि के समीप औरंगजेब के मरने पर यह जिला औरंगाबाद कहा जाने लगा. अलाउद्दीन यहां से असंख्य धन लूटकर ले गया और उसके सेनापति काफूर रामचंद्र को बंदी बनाकर ले गया. कुछ वक्त के बाद काफूर ने रामचंद्र को आजाद कर दिया. यही कारण था कि देवगिरि के राजा ने तेलंगाना के युद्ध में काफूर को हथियारों की मदद दी थी. शकंरदेव ने सिंहासन पर बैठने के बाद मुसलमानों से शत्रुता बढ़ा ली जिसका फल यह हुआ कि शंकरदेव को हराकर काफूर ने देवगिरि पर अधिकार कर लिया. देवगिरि का नाम मुहम्मद तुगलक के साथ भी जुड़ा हुआ है. उसने राजधानी दिल्ली से हटाकर देवगिरि (दौलताबाद) में स्थापित की और से फिर दिल्ली वापस किया था. प्राचीन इतिहास की कहानी जानने के लिए आज भी देश-विदेश से पर्यटक यहां आते हैं.

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