तपती रेत में पैदल चलकर स्कूल जाने वाले चूनाराम का इसरो में चयन

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तपती रेत में पैदल चलकर स्कूल जाने वाले चूनाराम का इसरो में चयन तपती रेत में पैदल चलकर स्कूल जाने वाले चूनाराम का इसरो में चयन

मिली जानकारी के अनुसार पाकिस्तान सीमा से सटे राजस्थान में बाड़मेर जिले के बायतु निवासी चुनाराम जाट ने आॅल इंडिया स्तर पर 12वीं रैंक हासिल की है । ग्रामीण परिवेश में पले-बढ़े चूनाराम जाट को 8वीं कक्षा तक की पढ़ाई के लिए अपने घर से 4 किलोमीटर दूर पैदल चलकर जाना होता था। इसके बाद उन्होंने 9वीं कक्षा में बाड़मेर जिले के ही नवोदय विघालय में 12वीं कक्षा तक अध्ययन किया। विघालय के गोल्ड मेडलिस्ट बने । वर्ष 2012 में चूनाराम जाट का चयन एनआईआईटी सूरत में हो गया,वहां चार साल का कोर्स करते हुए के लिए तैयारी जारी रखी और हाल ही में उनका इसरो में चयन हो गया । चूनाराम के पिता भोलाराम ने बताया कि चूनाराम ने चिमनी की रोशनी में बैठकर पढ़ाई की,घर भी कच्चा था । स्कूल के लिए वह तपती रेत में नंगे पांव स्कूल जाते थे । दरअसल,बाड़मेर और जैसलमेर जिलों में गर्मी के दिनों में तापमान 50 डिग्री से ऊपर पहुंच जाता है और यहां की रेत में चलना काफी मुश्किल होता है । भोलाराम का कहना है कि परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण बड़ा बेटे किशन कुमार पढ़ाई नहीं कर पाया,वह बचपन से ही एक फैक्ट्री में मजदूरी करने लग गया था । लेकिन आर्थिक स्थिति कमजोर होने के बावजूद चूनाराम ने पढ़ने का निश्चय किया और अब यह मुकाम हासिल किया । उन्होंने बताया कि चूनाराम बचपन से ही वैज्ञानिक बनने का निश्चय ।

 


 

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